राजस्थान। शुभकरण परिहार पंचायती राज विभाग में जूनियर असिस्टेंट के पद था। 2010 में नौकरी लगी। तब एक प्लॉट था। 17 साल की नौकरी में शुभकरण ने 60 बीघा (17 हेक्टेयर) से ज्यादा जमीन खरीद ली। घर से 3 करोड़ रुपए का सोना-चांदी मिला है। 76 लाख रुपए कैश में मिले हैं। जबकि उसे इन 17 साल की नौकरी में महज 17 लाख सैलरी मिली है।
शुभकरण 2022 तक रोजगार सहायक के पद पर रहा। इसके बाद पदोन्नति हुई और वह कनिष्क सहायक यानी ऑफिस असिस्टेंट हो गया। कानासार की पंचायत समिति बाप जिला फलौदी में ड्यूटी मिली। अब सैलरी 37 हजार पहुंच गई।
शुभकरण का काम मनरेगा के लिए जॉब कार्ड जारी करना, रोजगार आवेदन लेना, मस्ट्रोल भरना, काम की जिओ-टैगिंग, पीएम आवास योजना, सामाजिक सुरक्षा पेंशन और ग्रामीण विकास योजनाओं को लागू करवाना था। इन्हीं कामों के लिए शुभकरण घूस लेता। इससे इतना पैसा इकट्ठा कर लिया कि एक-एक साल में ही 5-5 जमीने खरीद लेता। इसने जो जमीनें खरीदी वह भी प्राइम लोकेशन पर ली।
ACB की टीम ने सर्किल रेट से जमीनों के रेट देखे। पता चला कि पत्नी के नाम पर 1 करोड़ 62 लाख की संपत्ति है। इसमें 6 फॉर्म हाउस और 5 प्लॉट हैं। खुद के नाम पर करीब 1 करोड़ की जमीन ली। आप तो जानते ही होंगे की जमीन सर्किल का लेन देन सर्किल रेट से कितना ऊंचे पर होता है।
शुभकरण के तीन और भाई हैं। उनकी आर्थिक स्थिति खराब है। वह मजदूरी और कपड़ा बेचने का काम करते हैं। सभी अलग रहते हैं।
फिलहाल एंटी करप्शन की टीम एक-एक चीज की पड़ताल कर रही है। चीजें जब्त कर रही है। शुभकरण कितने वक्त जेल में रहेगा यह वक्त बताएगा। लेकिन एक सवाल, एक छोटा बाबू इतनी काली कमाई कर रहा, फिर उन बड़े वालों का क्या, जो अपना जमीर बेच चुके हैं!







