नई दिल्ली। राजपाल यादव मामले में निवेशक माधव गोपाल अग्रवाल आये सामने एक निवेशक होने के बावजूद, वे वहां “बच्चों की तरह रोए”, क्योंकि उनके लिए वह रकम बहुत बड़ी थी और उन्हें डर था कि उनकी मेहनत की कमाई डूब जाएगी। यह मामला केवल पैसों के लेन-देन का नहीं, बल्कि विश्वास टूटने और एक मध्यमवर्गीय व्यापारी की बेबसी की कहानी बन गया है। उन्होंने राजपाल यादव की ‘सेलिब्रिटी इमेज’ और उनकी साख पर भरोसा करके यह बड़ी रकम दी थी। यह मामला साल 2010 में शुरू हुआ था, जब राजपाल यादव ने अपनी निर्देशित फिल्म ‘अता पता लापता’ के लिए माधव गोपाल अग्रवाल से ₹5 करोड़ का कर्ज लिया था। जब पैसे लौटाने का समय आया, तो राजपाल यादव ने जो चेक दिए वे बाउंस हो गए। इसके बाद मामला कोर्ट तक पहुँच गया। इस धोखाधड़ी और चेक बाउंस मामले में राजपाल यादव को भारी कानूनी कीमत चुकानी पड़ी 2018 में जेल: दिल्ली हाईकोर्ट के आदेश पर राजपाल यादव को 3 महीने की जेल काटनी पड़ी थी क्योंकि वे कर्ज की रकम चुकाने में विफल रहे थे और कोर्ट में गलत हलफनामा (Affidavit) पेश किया था।






