best news portal development company in india

गधे पर बैठकर निकलते हैं लाट साहब… बरसते हैं जूते-चप्पल 

SHARE:

शाहजहांपुर। देशभर में होली अलग-अलग अंदाज में खेली जाती है। फूलों से तो कहीं लट्ठमार होली प्रसिद्ध है। शाहजहांपुर की जूते मार होली अपनी अलग ही पहचान रखती है। जिले में जुलूस निकालने की कई तरह की परंपराएं है। चौक कोतवाली व रामचंद्र मिशन क्षेत्र से जहां भैंसा गाड़ी पर लाट साहब को बैठाकर जुलूस निकाला जाता है। रंगों की बौछार के साथ ही लोग जूते चप्पले मारते हुए इस जुलूस में चलते हैं। अनोखी परंपरा वाले इस जुलूस की वजह भी रोमांचक है।

दरअसल ब्रिटिश शासनकाल में अत्याचार के विरोध में शुरू की इस परंपरा में अंग्रेजों के प्रतीक लाट साहब के रूप में व्यक्ति को भैंसागाड़ी पर बैठाया जाता है। उसके बाद रंगों की बौछार के बीच जूते-चप्पल व झाड़ू मारते हुए जुलूस के रूप में पूरे शहर में घुमाया जाता है।

अनोखे अंदाज के कारण यह जुलूस पूरे देश में चर्चित है। वहीं शहर के अब्दुल्लागंज, पुवायां के बड़ागांव, खुदागंज समेत कई जगह गधे पर बैठकर लाट साहब प्रमुख मार्गों पर घूमते हैं। जिसमे बड़ी संख्या में लोग रंग-गुलाल खेलते हुए चलते हैं।

अब्दुल्लागंज मुहल्ले में एक व्यक्ति को लाट साहब बनाकर गधे पर बैठाकर जुलूस निकाला जाता है। यह जुलूस तीन किमी के दायरे में निकला है। दो से तीन हजार के करीब भीड़ भी रहती है, जबकि सदर क्षेत्र के बहादुरगंज में पिकअप पर सवार होकर लाट साहब पांच किमी तक घूमते हैं। इस जुलूस के साथ चार ढोल व चार नगाड़े वाले भी रहते हैं।

Leave a Comment