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SIR ने मिलवाया परिवार, 28 बाद मिले दो भाई, होली की खुशियां हुईं दोगुनी

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महोबा: उत्तर प्रदेश के महोबा जिले में मतदाता सूची का विशेष गहन पुनरीक्षण (UP SIR) को लेकर कई प्रकार के विवाद गहराए। एसआईआर प्रक्रिया को लेकर सवाल उठाए गए। कई लोगों के नाम कटने की बात सामने आई। हालांकि, महोबा जिले में एसआईआर एक परिवार के लिए खुशियों का पिटारा बन गया। इसकी वजह से एक परिवार की होली की खुशियां दोगुनी हो गई। 28 साल पहले बिछड़े दो भाई जब मिले तो खुशी से उनके आंसू छलक पड़े। उनकी खुशी का ठिकाना न रहा। किसी को विश्वास न हुआ कि जिसके आने की उम्मीद छोड़ दी थी। आज वह सामने खड़ा है।

दरअसल, पूरा मामला जिले के कबरई विकासखंड की ग्राम पंचायत भंडरा का है। यहां गुनिया मिश्रा अपने दो बेटों संतोष मिश्रा और आत्मदेव मिश्रा के रहते थे। लगभग 28 वर्ष पहले यहां गांव में कोई काम-धंधा न मिला तो आत्मदेव अपने साथी विजय सोनी के साथ घर से बिना किसी को बताए कहीं निकल गए।

खोजने से भी नहीं मिले भाई

घर से निकलने पर परिजनों ने उनकी खूब खोजबीन की। हर जगह पता किया, लेकिन आत्मदेव नहीं मिले। दो दशक से ज्यादा का समय बीतने के बाद परिवार ने उनके लौटने की उम्मीद भी छोड़ दी थी। लोग उन्हें भूल भी गए थे। लेकिन, शनिवार को आत्मदेव मिश्रा अपने भंडरा गांव स्थित अपने घर पहुंच गए। वहां उन्हें देखकर भाई संतोष मिश्रा और अन्य परिजनों को अपनी आंखों पर यकीन नहीं हुआ कि वह वापस लौट आए हैं।

मजदूरी कर किया गुजर बसर

आत्मदेव मिश्रा ने बताया कि साथी विजय सोनी के साथ रोजगार की तलाश में वह घर से निकल गए थे। जिसके बाद वह हरियाणा पहुंचे और यहां पर मजदूरी का काम शुरू किया। काम मे मन लगने पर वहीं रहने लगे। वहीं, विजय अन्य जगह काम करने लगा। एसआईआर अभियान शुरू होने के बाद जब सूची मे नाम जुड़वाने के लिए वर्ष 2003 की मतदाता सूची की जानकारी मांगी, जिसे वह न दे सका। फिर घर की याद आई। घर से कोई संपर्क नहीं होने के कारण उन्हें फिर से गांव लौटना पड़ा।

अब नहीं जाना वापस

आत्मदेव ने बताया कि जब वह श्रीनगर से अपने भंडरा गांव आटो से पहुंचा, लेकिन यहां उसे कोई पहचान नहीं पाया। घर पर अब परिवार का जो प्यार मिला है, उसे शब्दों में बयां नहीं कर सकता हूं। उन्होंने बताया कि वह हरियाणा के जनपद जींद में प्रताप सिंह के यहां रहकर खेती बाड़ी में हाथ बंटवाता था। इसके बदले उसे खाना खुराक मिल जाती थी। उसने विवाह भी नहीं किया है। अब वह हंसी-खुशी गांव में ही रहना चाहता है। वहीं, उनके आने से परिवार की होली की खुशियां दोगुनी हो गईं हैं।

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