लखनऊ। उत्तर प्रदेश में जल्द ही योगी आदित्यनाथ सरकार का मंत्रिमंडल विस्तार होने की संभावना देखी जा रही है। राजनीतिक गलियारों में इसकी चर्चा जोरों पर है। सूत्रों के मुताबिक कुछ पुराने मंत्रियों को हटाया जा सकता है, जबकि नए युवा चेहरों को मौका मिल सकता है। यह विस्तार 2027 विधानसभा चुनावों से पहले अंतिम बड़ा बदलाव होगा। हाल ही में बीजेपी ने पंकज चौधरी को यूपी का नया प्रदेश अध्यक्ष बनाया है, जिसके बाद से ही संगठन और सरकार में बदलाव की अटकलें बढ़ गई हैँ।
इस मंत्रिमंडल विस्तार में कुछ मंत्रियों का पत्ता कट सकता है। तो कुछ संगठन में भेजे जा सकते हैं, प्रदर्शन के आधार पर एक दर्जन मंत्रियों को बदला जा सकता है। जिससे क्षेत्रीय संतुलन और जातीय समीकरणों को संतुलित किया जा सके। पूर्वांचल से सीएम और प्रदेश अध्यक्ष होने के कारण पश्चिमी यूपी और बुंदेलखंड को ज्यादा प्रतिनिधित्व मिल सकता है।
विस्तार में युवा और नए विधायकों को जगह मिलने की उम्मीद जतायी जा रही है। पार्टी 2024 लोकसभा चुनावों में कमजोर प्रदर्शन के बाद जातीय समीकरण मजबूत करना चाहती है। पूजा पाल, मनोज पाण्डेय और भूपेंद्र चौधरी समेत छह नए मंत्रियों की चर्चा है।
एक और बड़ा मुद्दा तीसरे उप-मुख्यमंत्री का है। विशेषज्ञों का मानना है कि बीजेपी पीडीए वोट बैंक को तोड़ने के लिए इस पर दांव खेल सकती है। किसी दलित चेहरे को यह पद देकर पार्टी विपक्ष को जवाब देना चाहती है। फिलहाल कैबिनेट में 54 मंत्री हैं, जो 60 तक बढ़ सकता है। क्षेत्रीय संतुलन बनाए रखना चुनौती होगी। यह विस्तार बीजेपी की रणनीति का हिस्सा है,जो पंचायत चुनावों से लेकर विधानसभा चुनावों तक प्रभाव डालेगा।






