भारत की ऊर्जा सुरक्षा को एक बड़ा रणनीतिक बढ़ावा मिलने वाला है. अबू धाबी नेशनल ऑयल कंपनी ने भारत के अंदर अपने कच्चे तेल के भंडारण की मौजूदगी को काफी हद तक बढ़ाने पर सहमति जताई है. संयुक्त अरब अमीरात के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की यात्रा के दौरान अंतिम रूप दिए गए इस समझौते के तहत अबू धाबी नेशनल ऑयल कंपनी भारत की भूमिगत भंडारण सुविधाओं के अंदर लगभग 30 मिलियन बैरल रणनीतिक कच्चा तेल आरक्षित रखेगी. यह कदम एक ऐसे समय में उठाया गया है जब पश्चिम एशिया में तनाव और होर्मुज स्ट्रेट में संभावित रूकावटों की आशंकाओं की वजह से वैश्विक ऊर्जा सुरक्षा संबंधी चिंताएं बढ़ गई हैं. इसी बीच आइए जानते हैं कि इस रिजर्व से कितने दिन चल सकता है काम.
30 मिलियन बैरल का भंडार
भारत वर्तमान में अपनी परिवहन, औद्योगिक और ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने के लिए हर दिन लगभग 5.5 मिलियन बैरल कच्चे तेल की खपत करता है. खपत के इस स्तर के आधार पर यूएई का प्रस्तावित 30 मिलियन बैरल का भंडार किसी गंभीर आपात स्थिति या फिर आपूर्ति में रुकावट के दौरान भारत के कच्चे तेल की जरूरत को लगभग 5.5 से 6 दिनों तक पूरा कर सकता है.
यह समझौता भारत के भंडार को बढ़ाएगा
वर्तमान में भारत का कुल रणनीतिक पेट्रोलियम भंडार लगभग 5.3 मिलियन टन का है. अबू धाबी नेशनल ऑयल कंपनी के 30 मिलियन बैरल के जुड़ने से देश की रणनीतिक भंडार क्षमता में लगभग 70% की बढ़ोतरी होने की उम्मीद है. विशेषज्ञों का ऐसा कहना है कि इससे वैश्विक तेल संकट या फिर युद्धकाल में आपूर्ति में होने वाली रूकावटों के खिलाफ भारत की तैयारी काफी मजबूत होगी.
भंडारण का खर्च यूएई उठाएगा
इस समझौते का सबसे जरूरी पहलू यह है कि भंडार तेल का स्वामित्व अबू धाबी नेशनल ऑयल कंपनी और यूएई सरकार के पास ही रहेगा. इसके अलावा खबरों के मुताबिक भारत की भूमिगत गुफाओं के अंदर इस कच्चे तेल के भंडारण से जुड़ा पूरा वित्तीय बोझ यूएई ही उठाएगा.
कितना हो जाएगा भारत का तेल बैकअप?
जब भारत के रिफाइनरी स्टॉक और मौजूदा रणनीति पेट्रोलियम भंडार को इसमें मिला दिया जाता है तो देश के कुल कच्चे तेल की बैकअप क्षमता कथित तौर पर 74 से 47 दिनों के बीच बढ़ सकती है. भंडार का यह स्तर काफी जरूरी माना जाता है क्योंकि भारत अपने कच्चे तेल की जरूरत का एक बड़ा हिस्सा दूसरे देशों से इंपोर्ट करता है.






