यूपी से लेकर दिल्ली तक एक ही सवाल गूंज रहा है—क्या सुधार के नाम पर नया अन्याय खड़ा किया जा रहा है?
विश्वविद्यालयों और कॉलेज कैंपस में जातिगत भेदभाव कम करने के उद्देश्य से किए गए बदलाव अब खुद विवाद का कारण बनते जा रहे हैं। जिन संशोधनों को बराबरी की दिशा में कदम बताया गया था, उन्हें लेकर आज छात्रों, शिक्षकों और सामाजिक वर्गों में गहरी नाराज़गी दिख रही है।
मंगलवार को बड़े स्तर पर प्रदर्शन की तैयारी है, और माहौल साफ बता रहा है कि यह सिर्फ एक नीति का विरोध नहीं, बल्कि भविष्य की शिक्षा व्यवस्था को लेकर चिंता है।
इसी बीच, जाने-माने कवि कुमार विश्वास का खुलकर सामने आना इस मुद्दे को और धार दे गया है। उनकी आपत्ति सिर्फ विरोध नहीं, बल्कि एक चेतावनी है—
“चाहे तिल लो या ताड़ लो राजा,
राई लो या पहाड़ लो राजा,
मैं अभागा ‘सवर्ण’ हूँ मेरा,
सैंया-सैंया उखाड़ लो राजा..।”







