विशाल कोदंडा प्रतिमा को राउरकेला में आठ महीनेकी अवधि में तैयार किया

SHARE:

विशाल कोदंडा प्रतिमा को राउरकेला में आठ महीने की अवधि में तैयार किया गया था। इसे कांचीपुरम की 48 महिला कारीगरों ने बनाया था, जो असाधारण शिल्प कौशल का प्रमाण है। यह आध्यात्मिक यात्रा 3 जनवरी, 2026 को ओडिशा के सभी 30 जिलों से होते हुए शुरू हुई। बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने इसमें भाग लिया, जिसस े यह एक राज्यव्यापी धार्मिक जुलूस में तब्दील हो गई। 19 जनवरी को कोदंडा तोप जगन्नाथ मंदिर में दर्शन के लिए पुरी पहुंची। प्रार्थना के बाद उसने अयोध्या की ओर अपनी यात्रा फिर से शुरू की। इस धनुष पर भारत की सैन्य वीरता को दर्शाने वाली जटिल नक्काशी की गई है, जिसमें कारगिल युद्ध के दृश्य भी शामिल हैं। यह समर्पण, राष्ट्रीय गौरव और सांस्कृतिक एकता का प्रतीक है। कोदंडा के साथ-साथ 233 वर्ष पुरानी संस्कृत रामायण की पांडुलिपि भी भेंट की गई है। इसे अयोध्या के

 

राम कथा संग्रहालय में स्थायी रूप से संरक्षित किया जाएगा।

Leave a Comment

best news portal development company in india
सबसे ज्यादा पड़ गई