जहां मिलेगा सस्ता तेल, वहां से लेंगे, भारत ने अमेरिका को दो टूक कहा सरकार के प्रतिनिधियों ने भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों का 85% से अधिक आयात करता है। ऐसे में, अगर रूस या किसी अन्य देश से डिस्काउंट पर तेल मिल रहा है, तो उसे ठुकराना भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए नुकसानदायक होगा।वर्तमान में वैश्विक भू-राजनीतिक दबावों के बीच भारत ने एक बार फिर अपनी स्वतंत्र विदेश नीति का परिचय दिया है।
अमेरिका के साथ चल रही व्यापारिक बातचीत के बीच नई दिल्ली ने यह बात साफ कर दी है कि ऊर्जा सुरक्षा के मामले में वह किसी भी बाहरी दबाव के आगे नहीं झुकेगा। भारत ने ‘लक्ष्मण रेखा’ खींचते हुए साफ शब्दों में कहा है कि देश के नागरिकों का हित सर्वोपरि है और जहां से भी सस्ता कच्चा तेल मिलेगा, भारत उसे खरीदने के लिए स्वतंत्र है।







