नई दिल्ली। संसद के बजट सत्र के दौरान राज्यसभा सांसद स्वाति मालीवाल ने निजी अस्पतालों की मनमानी वसूली का मुद्दा जोर-शोर से उठाया। उन्होंने इलाज के नाम पर हो रही लूट को लेकर सरकार के सामने औपचारिक शिकायत दर्ज कराई और केंद्र सरकार के समक्ष चार अहम मांगें रखीं।
सोमवार को बजट सत्र के भाषण में स्वाति मालीवाल ने कहा कि आज हालात ऐसे हैं कि जब कोई मरीज किसी प्राइवेट अस्पताल की इमरजेंसी में पहुंचता है, तो आम परिवार को घर के गहने तक गिरवी रखने की नौबत आ जाती है। उन्होंने आरोप लगाया कि निजी अस्पतालों में इलाज से पहले सबसे पहला सवाल पूछा जाता है— “मेडिक्लेम है या नहीं?” और जैसे ही बीमा होने की पुष्टि होती है, मनमानी बिलिंग शुरू हो जाती है।
स्वाति मालीवाल ने मांग की कि
क्लीनिकल स्टेब्लिशमेंट एक्ट को सभी राज्यों में सख्ती से लागू किया जाए,
निजी अस्पतालों की फीस और इलाज पर नियंत्रण हो,
अस्पतालों में सुविधाएं और पारदर्शिता बढ़ाई जाए,
और मरीजों के अधिकारों की प्रभावी सुरक्षा सुनिश्चित की जाए।
उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य कोई लग्ज़री नहीं, बल्कि हर नागरिक का अधिकार है—और इस पर लूट किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं की जानी चाहिए।







