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ओवरलोडिंग से ट्रक पंजीयन तक, मिर्जापुर में करोड़ों के खेल पर उठे सवाल

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मिर्ज़ापुर। जनपद में ओवरलोड वाहनों से कथित अवैध वसूली की खबर सामने आने के बाद प्रशासनिक और विभागीय व्यवस्थाओं की कई परतें खुलती नजर आ रही हैं। दो दिन पहले पत्रकारों के विभिन्न समूहों में वायरल हुई खबर में आरोप लगाया गया था कि ओवरलोड वाहनों से “इंट्री” के नाम पर प्रतिदिन हजारों रुपये की अवैध वसूली की जा रही है। आरोप यह भी था कि जिले की गाड़ियों से चार हजार और बाहरी जनपदों की गाड़ियों से पांच हजार रुपये प्रति वाहन तक वसूले जा रहे हैं।

खबर सामने आने के बाद खनन विभाग ने बड़े स्तर पर कार्रवाई शुरू कर दी है। अपर जिलाधिकारी विनोद कुमार सिंह के निर्देशन में खान अधिकारी जितेंद्र सिंह की टीम ने 1 जून से 17 जून तक चलाए गए अभियान में 45 वाहनों का ऑनलाइन चालान कर 19.36 लाख रुपये की वसूली की है। इसके अतिरिक्त 32 वाहनों को विभिन्न थानों की अभिरक्षा में रखा गया है, जिनसे 27.20 लाख रुपये की अतिरिक्त वसूली की प्रक्रिया जारी है। सूत्रों के अनुसार कई क्रशर प्लांट संचालकों पर भी प्रति वाहन पांच लाख रुपये तक की शास्ति लगाने की तैयारी चल रही है।

इस कार्रवाई के बीच परिवहन विभाग के आंकड़ों ने एक और महत्वपूर्ण तथ्य उजागर किया है। विभागीय अभिलेखों के अनुसार पिछले लगभग डेढ़ वर्ष से मिर्जापुर में एक भी नए ट्रक का पंजीयन नहीं हुआ है। अधिकारियों का कहना है कि उत्तर प्रदेश और बिहार में पंजीयन मानकों के अंतर के कारण ट्रक मालिक अपने नए वाहन बिहार में पंजीकृत करा रहे हैं। उत्तर प्रदेश में ट्रकों का पंजीयन 52 टन भार क्षमता तक जबकि बिहार में 55 टन तक की अनुमति होने से वाहन स्वामी तीन टन अतिरिक्त क्षमता का लाभ लेने के लिए बिहार का रुख कर रहे हैं।

जानकारी के मुताबिक प्रतिमाह लगभग 50 नए ट्रक बिहार सहित अन्य राज्यों में पंजीकृत हो रहे हैं, जिससे मिर्जापुर के परिवहन विभाग को भारी राजस्व हानि उठानी पड़ रही है। अनुमान है कि केवल इस वजह से जिले को प्रतिवर्ष करीब दो करोड़ रुपये के राजस्व का नुकसान हो रहा है।

इस पूरे मामले ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं। यदि ओवरलोडिंग, बाहरी राज्यों में पंजीयन और वाहनों के संचालन की यह स्थिति लंबे समय से बनी हुई थी तो संबंधित विभागों को इसकी जानकारी पहले क्यों नहीं थी? पत्रकारों द्वारा मामला उजागर किए जाने के बाद ही कार्रवाई क्यों शुरू हुई? क्या निगरानी व्यवस्था पहले से प्रभावी थी या शिकायतों और जनदबाव के बाद विभाग सक्रिय हुआ?

स्थानीय ट्रांसपोर्टरों का कहना है कि ओवरलोडिंग, बाहरी राज्यों में पंजीयन और कथित अवैध वसूली का मुद्दा वर्षों से चर्चा का विषय रहा है, लेकिन प्रभावी कार्रवाई बहुत कम देखने को मिली। वहीं प्रशासन का दावा है कि अभियान आगे भी जारी रहेगा और नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ सख्त कदम उठाए जाएंगे।

फिलहाल मिर्जापुर में सामने आ रहे नए तथ्यों ने परिवहन, खनन और प्रवर्तन व्यवस्था की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। अब जनता की निगाह इस बात पर है कि कार्रवाई केवल जुर्माना वसूली तक सीमित रहती है या अवैध वसूली, विभागीय जवाबदेही और राजस्व नुकसान के मूल कारणों तक पहुंचकर स्थायी सुधार की दिशा में ठोस कदम उठाए जाते हैं।

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