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आपदा के बाद से अंधेरे में रहने को विवश कई गांव के लोग

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आखि़र कब तक ग्रामीणों को मिलेगी बिजली, कौन जिम्मेदार

मिर्ज़ापुर। उत्तर प्रदेश के मिर्जापुर जनपद के पहाड़ी ब्लॉक में तीन दिन पहले आए तेज तूफान और आंधी के बाद दर्जनों गांवों की बिजली व्यवस्था अब तक पूरी तरह बहाल नहीं हो सकी है। जिम्मेदार अधिकारियों द्वारा “युद्ध स्तर पर कार्य” किए जाने के दावे किए गए थे, लेकिन जमीनी हकीकत यह है कि ग्रामीण आज भी अंधेरे में रात काटने को मजबूर हैं।
“तीन दिन से अंधेरे में गांव, आखिर जिम्मेदार कौन?”
पहाड़ी ब्लॉक के कई गांवों में बिजली के खंभे टूटे पड़े हैं, तार खेतों और सड़कों पर लटके हुए हैं, जबकि विभागीय मरम्मत कार्य बेहद धीमी गति से चल रहा है। भीषण गर्मी में बिजली न रहने से पेयजल संकट भी गहराने लगा है। मोबाइल चार्ज करने तक के लिए ग्रामीणों को कई किलोमीटर दूर जाना पड़ रहा है।
ग्रामीणों का कहना है कि अधिकारियों ने पहले 24 घंटे में सप्लाई बहाल करने का आश्वासन दिया था, लेकिन अब तीन दिन बीत जाने के बाद भी स्थिति जस की तस बनी हुई है। सवाल उठ रहा है कि जब “युद्ध स्तर” पर काम हो रहा था तो आखिर अब तक बिजली क्यों नहीं आई?
जनता का फूटा गुस्सा
ग्रामीणों में बिजली विभाग के प्रति भारी नाराजगी देखी जा रही है। लोगों का कहना है कि शहरों में सप्लाई जल्द बहाल कर दी जाती है, लेकिन गांवों को हमेशा नजरअंदाज किया जाता है। छोटे बच्चों, बुजुर्गों और मरीजों को सबसे ज्यादा परेशानी झेलनी पड़ रही है।
प्रशासन और बिजली विभाग पर उठे सवाल
क्या विभाग के पास आपदा से निपटने की पर्याप्त तैयारी नहीं थी?
क्या ग्रामीण क्षेत्रों की समस्याएं अधिकारियों की प्राथमिकता में नहीं हैं?
आखिर कब तक अंधेरे में रहने को मजबूर रहेंगे पहाड़ी ब्लॉक के ग्रामीण?
अब ग्रामीणों की मांग है कि प्रशासन तत्काल अतिरिक्त टीम लगाकर बिजली आपूर्ति बहाल कराए और लापरवाही के लिए जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय करे।

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