अखिल भारतीय वैश्य महासम्मेलन के प्रतिनिधि मण्डल ने फ़िल्म के खिलाफ आंदोलन को दिया समर्थन
मिर्ज़ापुर। किसी फिल्म का शीर्षक उसकी मूल भावना होती है। शीर्षक ही पूरे फिल्म का सार होता है। हाल ही में आयी फिल्म घूसखोर पंडत जिसका शीर्षक केवल आपत्तिजनक ही नहीं, यह बेहद अपमानजनक भी है। ऐसी भावना से बनी फिल्में नाम बदलकर भी रिलीज नहीं होनी चाहिए। फिल्में देश और समाज को दिशा देती हैं। ऐसे शीर्षक आधारित फिल्में अपनी सोच से समाज में विघटन उत्पन्न करती हैं। यह शीर्षक बेहद आपत्तिजनक है। यह बेहद दुःख और चिंता का विषय है कि फ़िल्म का मुहूर्त इन्ही बुद्धिजीवी विप्र समाज के लोगों से कराया जाता है फिर इन्ही को अपमानित करने की सोच के साथ ऐसी फिल्मे बनायी जाती है।
जब तक फिल्म बनाने वालों को आर्थिक हानि नहीं होगी, तब तक ऐसी सोच पर आधारित फिल्में बनाना बंद नहीं होगी।

जातियों में विभेद फैलाने की कोशिशें बढ़ी है। बृहद समाज में किसी भी जाति के योगदान को भुलाया नहीं जा सकता है। उन्हें अपमानित करने का कोई अधिकार नहीं है, उनके इतिहास और योगदान से सीखने की जरूरत है।
आज ब्राह्मण समाज को दुर्भावना ग्रसित लक्ष्य पर रखा जा रहा है। अगर चुप रहे तो आगे यह विभेधात्मक और अपमानजनक कुत्सित प्रयास अन्य किसी भी जाति धर्म के साथ भी हो सकता है। वैश्य समाज ने सदैव सनातन संस्कृति और समाज में सद्भाव के लिए काम किया है। सामाजिक सद्भावना को बिगाड़ना वाले तत्वों के खिलाफ पूरा वैश्य समाज एकजुट हो ब्राह्मण समाज के साथ खड़ा है। विप्र समाज सदैव सनातन संस्कृति का अगवा रहा है उन्होंने समाज को राह दिखाने का काम किया है। उनका अपमान संपूर्ण देश का अपमान है जो सनातन संस्कृति को तोड़ने की साजिश है। ऐसी जाति सूचक शीर्षक पर आधारित फिल्म का वैश्य समाज विरोध करते हुए इसकी घोर निंदा करता है।

ये बातें कहते हुए अखिल भारतीय वैश्य महासम्मेलन के प्रदेश महामंत्री शैलेंद्र अग्रहरी के साथ पदाधिकारियों ने विंध्याचल धाम में ज्योर्तिमठ के गौ प्रवक्ता पंडित शुभम मिश्रा एवं काली खोह मंदिर के प्रधानअर्चक आचार्य अगस्त मुनि द्विवेदी जी को अपना समर्थन पत्र सौंपा और केंद्र सरकार को संबोधित पत्र की छाया प्रति भी संलग्न की साथ ही इसके लिए होने वाले किसी भी आंदोलन में अपना पूर्ण सहयोग व समर्थन देने का वादा किया। इस दौरान अतिन कुमार गुप्ता, अनुज उमर भी उपस्थित रहे।







