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डोनाल्‍ड ट्रंप के लिए ईरान-गल्‍फ क्‍यों हो गया अहम?

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ईरान जंग तमाम जद्दोजहद के बाद आखिरकार समाप्‍त हो गया है. अमेरिका और ईरान के बीच पीस डील होने के बाद मिडिल ईस्‍ट में शांति बहाल हो गई है. दोतरफा हमले थम चुके हैं. शांति समझौते में ईरान की अधिकांश बातों को मान लिया गया. यहां तक कि लेबनान में इजरायल की तरफ से हमले नहीं किए जाएंगे, अमेरिका ने तेहरान की इस शर्त को भी मान लिया. वहीं, दूसरी तरफ इजरायल लेबनान पर लगातार हमले कर रहा था. शांति समझौता होने से पहले और उसके बाद भी इजरायल ने हिजबुल्‍ला के लेबनान स्थित ठिकानों पर हमले जारी रखा. राष्‍ट्रपति डोनाल्‍ड ट्रंप और उपराष्‍ट्रपति जेडी वेंस ने इजरायल की इसको लेकर तीखी टिप्‍पणियां कीं. ट्रंप ने लेबनान पर इजरायली हमले को पागलपन करार दिया था. वहीं, जेडी वेंस ने खुले तौर पर कहा कि पूरी दुनिया में एक डोनाल्‍ड ट्रंप ही हैं, जो इजरायल का साथ दे रहे हैं. वेंस ने इजरायल और प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्‍याहू की कड़े शब्‍दों में आलोचना की है. पिछले कई दशकों में शायद यह पहला मौका है जब इजरायल के प्रति अमेरिकी रवैया इतना सख्‍त हुआ है. इसकी बड़ी वजह है कि ट्रंप सरकार गल्‍फ रीजन में किसी भी तरह से शांति और स्‍थायित्‍व का हिमायत कर रही है. इजरायल का कदम ट्रंप सरकार की इस नीति के खिलाफ जा रहा था. हालांकि, अब इजरायल और लेबनान के बीच सीजफायर हो गया है. गल्‍फ में शांति और स्‍थायित्‍व भारत के हित में है, क्‍योंकि यह क्षेत्र भारत के एनर्जी का सबसे बड़ा स्रोत है. मिडिल ईस्‍ट में जारी तनाव और ईरान को लेकर चल रही कूटनीतिक कवायद के बीच अमेरिका और इजरायल के रिश्तों में पिछले कुछ सप्‍ताहों में असामान्य तनाव के संकेत सामने आए हैं. अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस द्वारा इजरायल को लेकर दिए गए तीखे बयान ने इस बहस को और तेज कर दिया है कि क्या दशकों पुरानी अमेरिका-इजरायल साझेदारी किसी महत्वपूर्ण मोड़ पर पहुंच रही है. उपराष्ट्रपति वेंस ने इजरायल को चेतावनी भरे अंदाज में संबोधित करते हुए कहा कि इस समय पूरी दुनिया में इजरायल के प्रति सहानुभूति रखने वाले नेताओं में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप सबसे महत्वपूर्ण व्यक्ति हैं. उन्होंने कहा कि यदि वह इजरायली सरकार का हिस्सा होते तो अपने एकमात्र शक्तिशाली सहयोगी के खिलाफ जाने से पहले गंभीरता से सोचते. वेंस ने आगे कहा कि इजरायल अपनी सुरक्षा के लिए अमेरिकी सैन्य सहायता और हथियारों पर काफी हद तक निर्भर है. उन्होंने इजरायली नेतृत्व से हकीकत को समझने तक की अपील कर डाली. वेंस ने कहा कि मौजूदा परिस्थितियों में तेल अवीव को अधिक संयमित रवैया अपनाना चाहिए. वेंस ने कहा कि अमेरिका इजरायल का अविश्वसनीय साझेदार रहा है और अमेरिकी मिसाइल रक्षा प्रणालियों ने इजरायल की सुरक्षा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है. अमेरिका के लिए गल्‍फ इजरायल से ज्‍यादा अहम क्‍यों?

अमेरिका ने इजरायल के कहने पर जब ईरान पर संयुक्‍त रूप से हमला बोला था, तब ट्रंप सरकार ने सपने में भी नहीं सोचा था कि उसका परिणाम इस हद तक आत्‍मघाती होगा. अमेरिका-इजरायल की ओर से ईरान पर अटैक के बाद मध्‍य-पूर्व के साथ ही पूरी दुनिया में उथल-पुथल जैसे हालात बन गए. एनर्जी रिच इस रीजन से गैस और तेल की सप्‍लाई थम गई, जिसका असर एशिया से लेकर यूरोप तक के देशों पर पड़ना शुरू हो गया. आर्थिक नैया डगमगाने लगी. इससे अमेरिका भी अछूता नहीं रहा. ईरान जंग के चलते अमेरिका दोतरफा घिर गया. एक तरफ हथियारों के इस्‍तेमाल में अरबों डॉलर खर्च होने लगे और दूसरी तरफ इकोनॉमी पर भी इसका बुरा असर पड़ने लगा. इसके अलावा अमेरिका के सहयोगी देशों की ओर से भी ट्रंप सरकार पर युद्ध को समाप्‍त कराने और गल्‍फ रीजन में शांति व्‍यवस्‍था बहाल करने का दबाव बढ़ने लगा था. अमेरिका-ईरान के बीच शांति में सबसे बड़ा पेच इजरायल बन गया. ईरान ने पीस डील के लिए लेबनान में इजरायली हमले को रोकने की शर्त रख दी. वहीं, इजरायल लेबनान स्थित हिजबुल्‍ला के ठिकानों पर लगातार अटैक कर रहा था, जिससे इस क्षेत्र में शांति बहाल प्रक्रिया बाधित हो रही थी. इजरायल के रवैये से राष्‍ट्रपति डोनाल्‍ड ट्रंप खासा नाराज भी हुए. ट्रंप ने इसके लिए इजरायल और प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्‍याहू को खुलेआम खरी-खोटी भी सुनाई।

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